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जियो फोन 2 से जुडी ख़ास बातें facts about jio phone-2 in hindi


हाल ही में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जियो फोन 2 को लॉन्च करने की घोषणा की। इस फोन की कीमत 2,999 रुपए रखी है, जिसकी बिक्री 15 अगस्त 2018 से शुरू होगी। पिछले साल भी मुकेश अम्बानी ने 4G VoLTE सपोर्ट करने वाला दुनिया का पहला फीचर फोन लॉन्च किया था, लेकिन ये फोन सिंगल सिम ही सपोर्ट करता था जबकि जियो फोन 2 ड्यूअल सिम सपोर्ट करने वाला फोन है।

ड्यूअल सिम सपोर्ट होने के साथ ही सबसे पहला सवाल आता है कि क्या इस फोन में जियो के अलावा भी किसी दूसरे ऑपरेटर की सिम इस्तेमाल की जा सकती है। इसके साथ ही और भी कई तरह के सवाल मन में आते हैं इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं जियो फोन 2 से जुड़े ऐसे ही 10 सवालों के जवाब…
सवाल 1: जियो फोन 2 में वॉट्सऐप चलेगा, तो क्या ये एंड्रॉयड होगा?
जवाब : नहीं, जियो फोन 2 KaiOS पर ही काम करेगा और ये एंड्रॉयड नहीं रहेगा। हालांकि इस फोन में यूट्यूब, फेसबुक और वॉट्सऐप जैसी ऐप्स काम करेंगी और यही ऐप्स पिछले साल लॉन्च हुए जियो फोन में भी आएंगी। जियो फोन 2 में ये तीनों ऐप्स प्री इंस्टॉल्ड रहेंगी।
सवाल 2: 1500 रुपए वाले जियो फोन में वॉट्सऐप, फेसबुक और यूट्यूब चलाने के लिए क्या करना होगा?
जवाब: कंपनी ने साफ कहा है कि यूट्यूब, वॉट्सऐप और फेसबुक तीनों ही ऐप्स पुराने जियो फोन में भी 15 अगस्त से सपोर्ट करेंगी। इसके लिए कंपनी की तरफ से Patch भेजा जाएगा, जिसे अपडेट करना होगा। इसके बाद माय जियो ऐप स्टोर से इन ऐप्स को डाउनलोड किया जा सकेगा।
सवाल 3: क्या जियो फोन 2 में दूसरे ऑपरेटर की सिम सपोर्ट करेगी?
जवाब : नहीं, जियो फोन 2 में भी सिर्फ जियो की सिम ही सपोर्ट करेगी। हालांकि इसको लेकर कंपनी की तरफ से अभी कुछ नहीं कहा गया है।
सवाल 4: क्या इसके लिए नया जियो सिम कार्ड खरीदना होगा?
जवाब: नहीं, जियो फोन 2 के लिए नया जियो सिम कार्ड खरीदने की जरुरत नहीं होगी। अगर आपके पास पुराना जियो सिम कार्ड है, तो उसका इस्तेमाल इसमें किया जा सकता है।
सवाल 5: जियो फोन 2 में कौनसा वॉयस असिस्टेंट है?
जवाब: जियो फोन 2 भी वॉयस असिस्टेंट के साथ आएगा, जो रिलायंस जियो ने ही डेवलप किया है।
सवाल 6: पुराना जियो फोन है, तो क्या जियो फोन 2 खरीदना सही होगा?
जवाब:अगर पुराना जियो फोन है, तो जियो फोन 2 खरीदने का कोई मतलब नहीं है। हां, लेकिन अगर आप ड्यूअल सिम वाले फीचर फोन और क्वर्टी कीपैड वाले फोन का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो ठीक है। मगर जियो फोन 2 में स्क्रीन साइज, क्वर्टी कीपैड और ड्यूअल सिम के अलावा कुछ भी एक्स्ट्रा नहीं मिल रहा है।
सवाल 7: मानसून हंगामा ऑफर के तहत 501 रुपए में कौन सा फोन मिलेगा?
जवाब: जियो ने जिस मानसून हंगामा ऑफर को पेश किया है, वो सिर्फ 1500 रुपए वाले जियो फोन के लिए ही है। इस ऑफर के तहत किसी भी ब्रांड का फीचर फोन एक्सचेंज कराके सिर्फ 501 रुपए में जियो फोन को खरीद सकते हैं। हालांकि जियो फोन 2 को 2,999 रुपए में ही खरीदा जा सकेगा।
सवाल 8: मानसून हंगामा ऑफर कब से शुरू होगा?
जवाब: मानसून हंगामा ऑफर 21 जुलाई से शुरू होगा और इसका फायदा जियो स्टोर से लिया जा सकता है।
सवाल 9: जियो फोन 2, पिछले साल लॉन्च हुए जियो फोन से बेहतर है?
जवाब: इस बारे में तो अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन जियो फोन 2 में प्रोसेसर, रैम, स्टोरेज, ओएस सब कुछ वही दिया गया है जो 1500 रुपए वाले जियो फोन में दिया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जियो फोन 2 और पुराने जियो फोन की परफॉर्मेंस में शायद ही कोई अंतर दिखे।
सवाल 10: क्या जियो फोन 2 में हॉटस्पॉट मिलेगा?
जवाब: नहीं, जियो फोन 2 में भी कंपनी ने हॉटस्पॉट का फीचर नहीं दिया है। हालांकि इसमें वाई-फाई दिया गया है।

टाइटैनिक जहाज से जुड़े रोचक तथ्य


1. टाइटैनिक अपने समय का सबसे महंगा और भव्य जहाज था। यह इंग्लैंड के साउथंप्टन से न्यूयॉर्क के सफर पर निकला था। टाइटैनिक काफी मजबूत था और उसमें सुरक्षा के बहुत सारे उपाय भी थे। इसके बावजूद वह अपनी पहली ही यात्रा में आइसबर्ग से टकराकर डूब गया।


2. यह दुर्घटना 14 अप्रैल 1912 को रात 11:40 बजे पर हुई थी और 2:20 बजे जहाज समंदर में समा गया था।
3. समुद्री इतिहास की सबसे भीषण टाइटैनिक दुर्घटना में 1,517 लोग मारे गए थे।
4. आइसबर्ग जब नजर आया, उससे मात्र 30 सेकंड पहले दिख गया होता, तो जहाज की दिशा बदली जा सकती थी और तब शायद समुद्री इतिहास की यह भीषणतम दुर्घटना नहीं हुई होती।
5. टाइटैनिक शिप में भाप निकलने के लिए 4 स्मोकस्टेक्स लगे हुए थे। ये टाइटैनिक की तस्वीरों का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि उनमें से एक स्मोकस्टेक महज डेकोरेटिव पीस था, वह काम नहीं करता था। उसे सजावट के लिए लगाया गया था।
6. उस भयावह दुर्घटना की रात अटलांटिक महासागर में कैलिफोर्नियन नाम का एक और शिप तैर रहा था। वह टाइटैनिक से ज्यादा दूर भी नहीं था। लेकिन उसे सूचना मिलने में देर हो गई, इसलिए वह समय पर नहीं पहुंच पाया और ज्यादा यात्रियों को नहीं बचा पाया।
7. टाइटैनिक के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक दिन पहले लाइफबोट ड्रिल प्रैक्टिस की जानी थी। लेकिन उसे अंतिम क्षणों में कैंसिल कर दिया गया। अगर यह ड्रिल हो जाती, तो दुर्घटना के समय लाइफबोट्स का मैनेजमेंट ज्यादा अच्छी तरह किया जा सकता था।
8. टाइटैनिक फिल्म के सबसे इमोशनल सीन्स में वह दृश्य भी शामिल है, जब आइसबर्ग से जहाज टकराने के बाद भी म्यूजिक बैंड के सदस्य परफॉर्म करते रहते हैं। असली जहाज के दुर्घटनाग्रस्त होने पर सचमुच ऐसा ही हुआ था।
9. दुर्घटना के बाद बहुत-से पैसेंजर लाइफबोट्स के जरिए जान बचाने में कामयाब रहे थे। लेकिन और भी यात्रियों की जान बच सकती थी, क्याेंकि ज्यादातर लाइफबोट्स में बहुत सारी जगहें खाली रह गई थीं।
10. यह एक दिलचस्प फैक्ट है कि असली टाइटैनिक जहाज बनाने में जितना खर्च हुआ था, उससे कहीं ज्यादा खर्च जेम्स कैमरून की फिल्म ‘टाइटैनिक’ के निर्माण में हुआ।
11. टाइटैनिक को तबाह कर देने वाला कुख्यात आइसबर्ग समुद्र में दुर्घटना होने से 2,900 साल पहले से तैर रहा था।
12. इस भीषण दुर्घटना में जहाज का एक शेफ भी बच गया था। इसका कारण बड़ा दिलचस्प है। दरअसल, उस शेफ ने टाइटैनिक के डूबने से पहले काफी शराब पी ली थी। इसकी वजह से पानी में गिरने के बाद उसके शरीर का टेम्प्रेचर बहुत कम नहीं हो पाया। यहां बता दें कि टाइटैनिक के बहुत-से यात्री डूबने के बजाय ठंडे पानी से मरे थे।
13. अमेरिका की मशहूर चॉकलेट कंपनी हर्शे चॉकलेट्स के मालिक मिल्टन हर्शे ने भी टाइटैनिक का टिकट कटाया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना प्लान बदल दिया। इस तरह उनकी जान संयोग से बच गई।
14. टाइटैनिक में एक जापानी यात्री भी था, जो दुर्घटना में बच गया था। लेकिन जब वह वापस जापान पहुंचा, तो उसे जहाज को छोड़कर भागने के लिए लानत दी गई। कहा गया कि उसे डूबते जहाज के साथ बने रहना चाहिए था।
15. दुनिया के इतिहास में आइसबर्ग से टकराकर टूटने वाला टाइटैनिक अकेला बड़ा जहाज है।
16. टाइटैनिक जहाज के सफर शुरू करने से पहले एक खास प्रथा भी नहीं निभाई गई। सफर की शुरुआत से पहले प्रथा के मुताबिक, जहाज पर एक तय जगह पर शराब की बोतल तोड़ी जाती थी, लेकिन टाइटैनिक के सफर शुरू करने से पहले इस परंपरा
17. टाइटैनिक शिप में 13 ऐसे जोड़े सवार थे, जो अपना हनीमून सेलिब्रेट करने के लिए यात्रा पर निकले थे।
18. टाइटैनिक में बहुत सारे ऐसे लोग भी मौजूद थे, जो असल में इसमें सफर नहीं करने वाले थे। दरअसल, कोयले की कमी टाइटैनिक के सफर में बाधा हो रही थी। इसे दूर करने के लिए व्हाइट स्टार लाइन जहाज को ओशिएनिक और एड्रियाटिक की यात्रा रद्द करनी पड़ी। व्हाइट स्टार लाइन ने अपना कोल स्टॉक और कुछ यात्रियों को टाइटैनिक पर शिफ्ट कर दिया था।
19. टाइटैनिक जहाज इंपीरियल स्टेट बिल्डिंग जितना ऊंचा था। इंग्लैंड की राजधानी लंदन में मौजूद टावर ब्रिज के बराबर लगभग इसकी ऊंचाई थी। यानी कहा जा सकता है कि इसकी ऊंचाई करीब 17 मंजिला इमारत के बराबर थी। वहीं, इस जहाज की लंबाई फुटबॉल के तीन मैदानों के बराबर थी।
20. जहाज में रोज 800 टन कोयले की खपत होती थी।
21. टाइटैनिक में लगी सीटी की आवाज को 11 मील की दूरी तक सुना जा सकता था।
22. टाइटैनिक शिप पर 9 कुत्ते थे, लेकिन शिप पर एक भी बिल्ली मौजूद नहीं थी। मान्यताओं के मुताबिक, शिप पर बिल्लियों को रखना अच्छा माना जाता है। इनसे बाधाएं टलती हैं और साथ ही, ये शिप पर छोटे जानवरों जैसे चूहे और गिलहरियों की संख्या भी कम करती हैं।
23. टाइटैनिक शिप में यात्रियों और क्रू मेंबर्स के खाने का अच्छा-खासा इंतज़ाम था। जहाज पर खाने के लिए 86,000 पाउंड मीट, 40,000 अंडे, 40 टन आलू, 3,500 पाउंड प्याज, 36,000 सेब और 1,000 पावरोटी के पैकेट के साथ कई तरह के खाने का सामान मौजूद था।
24. टाइटैनिक शिप में फर्स्ट क्लास में सफर करने के लिए आज से करीब सौ साल पहले 4,350 डॉलर (करीब 2 लाख 70 हजार रुपए) चुकाने पड़ते थे। वहीं, सेकंड क्लास के लिए 1,750 डॉलर ( करीब 1 लाख रुपए) और थर्ड क्लास के लिए 30 डॉलर (करीब दो हजार रुपए) की रकम चुकानी पड़ती थी। आज के वक्त में डॉलर की कीमत को देखा जाए, तो एक यात्री को 50 लाख रुपए खर्च कर इसमें सफर करने का मौका मिलता।
25. टाइटैनिक शिप के कैप्टन स्मिथ इस यात्रा के बाद रिटायरमेंट लेने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन ये सफर ही उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हो गया।
26. जहाज में 900 टन भारी बैग और बाकी माल रखा था।
27. जहाज पर रोजाना 14,000 गैलन पानी का इस्तेमाल होता था।
28. 16 लाइफ बोट इस्तेमाल करने में करीब 80 मिनट लग गए। पहली लाइफ बोट में केवल 28 लोग बैठे, क्योंकि बाकी लोगों को लगा ही नहीं की जहाज डूब सकता हैं।
29. टाइटैनिक जब डूबा, तो वो अपने सफर के चौथे दिन में था। जमीन से करीब 600 किलोमीटर दूर।
30. टाइटैनिक को उस चट्टान से टकराने से पहले छह चेतावनी मिली थी।

एरिया 51 से जुड़े रहस्यमयी FACTS



US स्टेट्स एयर फाॅर्स के अंदर आने वाले एरिया 51 के बारे में काफी कम लोगों को पता है। ये एरिया दुनिया के सबसे रहस्यमयी जगहों में एक मानी जाती है। कहा जाता है कि यहां अमेरिकी सरकार के कई सीक्रेट्स दफन हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं एरिया 51 से जुड़े 9 रोचक फैक्ट्स-

एलियंस का गढ़ माना जाता है एरिया 51
दुनिया में कई जगहों पर एलियंस के देखे जाने के दावे किए जाते हैं। लेकिन एरिया 51 में इन दावों में छुपी हकीकत देखने को मिलती है। इस जगह के आसपास कई बार ऐसी चीजें मिली हैं, जो इस दावे को पक्का करती हैं कि एलियंस होते हैं। अमेरिका के सीनियर साइंटिस्ट बॉयड बुशमैन एरिया 51 में जा चुके हैं। उन्होंने 2014 में अपने एक स्टेटमेंट से तहलका मचा दिया था। उन्होंने बताया था कि वो दूसरी दुनिया के प्राणी यानी एलियंस से बात कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने वो तरीका भी बताया था, जिससे ये एलियंस मात्र एक घंटे में पृथ्वी से अपने ग्रह का सफर तय करते हैं।

लोगों के मन में इस जगह को लेकर बैठा है डर
कई ऐसे लोग हैं, जो इस जगह पर जाना नहीं चाहते हैं। एडवर्ड लोविक नाम का एक शख्स, जो इस जगह पर 30 से ज्यादा सालों तक रह चुके हैं, उन्होंने लोगों के मन में बैठे डर को कम करने के लिए इस जगह का नाम पैराडाइज रैंच रखा था। लेकिन अब भी लोग इस खुफिया जगह पर जाने से डरते हैं। कई एलियंस की डेड बॉडीज वाली फोटोज भी इस एरिया से सामने आ चुकी हैं।

जानलेवा है ये जगह
अगर यहां आपकी जान एलियंस और न्यूक्लियर हथियारों से बच जाए, तो भी आप खतरे में हैं। दरअसल, इस जगह पर कई जहरीले मटेरियल्स अनसेफ तरीके से डंप किए गए हैं। इस वजह से यहां रहने वाले लोगों को स्किन डिजीज से लेकर कैंसर तक हो जाता है।

किसी को नहीं पता आखिर क्यों बनाया गया है ये सीक्रेट प्लेस
CIA ने सबसे पहले इस बात की घोषणा की थी कि अमेरिका में एरिया 51 नाम का कोई सीक्रेट प्लेस है। इससे पहले लोगों के बीच बस इस बात की चर्चा थी कि ऐसी कोई जगह मौजूद है। हालांकि, CIA ने इस बात का कभी जिक्र नहीं किया कि ये सीक्रेट प्लेस आखिर क्यों बनाया गया है?

नील आर्मस्ट्रांग कभी चांद पर गए ही नहीं!
जी हां, दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो ये मानते हैं कि नील आर्मस्ट्रांग कभी चांद पर नहीं गए। एरिया 51 में अमेरिका ने फेक सेटअप लगा कर उनसे मून पर लैंड करने की एक्टिंग करवाई थी। हालांकि, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है।

शायद यहां है कोई बड़ा न्यूक्लियर प्लांट
कई लोगों का ऐसा भी मानना है कि इस जगह पर अमेरिका ने सीक्रेट न्यूक्लियर प्लांट लगा रखा है। और यहीं से कई न्यूक्लियर वेपन्स भी बनाए जाते हैं।

यहां किए जाते हैं ड्रोन टेस्ट
कहते हैं कि इस जगह पर अमेरिकी ड्रोन्स की टेस्टिंग की जाती है। U-2 स्पाई प्लेन्स का टेस्ट इसी जगह पर किया गया था। माना जाता है कि अमेरिकी सरकार के इंजीनियर्स इस जगह पर कई मिलिट्री हार्डवेयर बनाते हैं।

गवर्नमेंट ने बंदूक की नोक पर खाली करवाया था एरिया
इस एरिया के आसपास जिन भी लोगों के घर थे, उन्हें अमेरिकी मिलिट्री फाॅर्स ने जबरदस्ती खाली करवाए थे। वजह किसी को बताई नहीं गई, लेकिन जिन्होंने भी जगह खाली करने से मना किया, उन्हें बंदूक की नोक पर डराकर ऐसा करवाया गया।

BBC ने की थी इस जगह पर घुसपैठ
2012 में BBC ने इस जगह पर डॉक्यूमेंट्री बनाने की सोची। इस वजह से कैमरा क्रू यहां चला तो गया लेकिन काफी देर तक वीराने में ड्राइव करने के बाद भी उनके हाथ कुछ नहीं लगा। हालांकि, जैसे ही सिक्योरिटी की नजर उनपर पड़ी, उन्हें जासूस समझकर बंधक बना लिया गया था।

नमक के बारे में 20 रोचक तथ्य



1. भारत नमक पैदा करने के मामले में विश्व में नंबर 3 पर है. भारत 70% नमक समुंद्र के पानी से बनाता है. 28% भूमिगत पानी से और 2% नमक झीलों के जल और नमक की चट्टानों से बनता है.

2. भारत में हर साल 24 मिलियन टन नमक का उत्पादन होता है और भारत को हर साल 18 मिलियन टन नमक की आवश्यकता होती है. 2020 तक भारत का लक्ष्य है 40 मिलियन टन नमक का उत्पादन करना.

3. भारत में जितने नमक का उत्पादन होता है उसका 35% ही खाने के लिए प्रयोग होता है.

4. भारत में सेंधा नमक का एकमात्र स्त्रोत हिमाचल प्रदेश में स्थित मंडी है.

5. भारत की आजादी से पहले नमक की इतनी कमी थी कि इसे दूसरे देशो से आयात करना पड़ता था. लेकिन आज भारत लगभग 20 देशों में 5 मिलियन नमक निर्यात करता है.

6. यदि सोडियम के कणों को क्लोरिन गैस के साथ मिला दिया जाए तो नमक बन जाएगा.

7. मनुष्य के शरीर की हर कोशिका में नमक होता है एक इंसान में लगभग 250 gm नमक होता है.

8. यदि उचित मात्रा में नमक खाया जाए तो यह हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है.

9. वैज्ञानिको के अनुसार नमक कभी खत्म नही हो सकता. क्योंकि समुंद्र कभी खत्म नही होंगे.

10. अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण अंतरिक्ष यात्री भोजन पर नमक या मिर्च नहीं छिड़क सकते.

11. यदि भारत के समुंद्री तटों पर बेमौसम बारिश ज्यादा हो जाए तो नमक के उत्पादन में भारी कमी आ जाएगी.

12. अमेरिका में सिर्फ 6% नमक खाने के लिए प्रयोग होता है और 17% सड़को पर जमीं बर्फ को पिघलाने के लिए.

13. एक आदमी को एक दिन में सिर्फ 2300 मिलीग्राम नमक खाना चाहिए. लेकिन बढ़ते चाइनीज फूड के कारण भारतीय बच्चे कुछ ज्यादा ही नमक खाने लगे है.

14. ज्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है.

15. दुनिया में सबसे पहले काला नमक भारत में बनाया गया था. अगर नमक के पानी में हरड के बीज घोल दिए जाए तो काला नमक बन जाता है.

16. ज्यादा नमक खाने से इंसान की मौत भी हो सकती है. दावा किया गया है कि अगर 100 kg वजन वाला इंसाम 100 gm नमक खा ले तो उसकी मौत हो सकती है.

17. पुराने समय में रोमन साम्राज्य में सिपाहियों को पैसे की जगह नमक दिया जाता था और जापान के सिनेमाघरों में भी फिल्म दिखाने से पहले नमक छिड़का जाता था.

18. पार्टी में या खाना खाने से पहले हम सलाद काटकर रख देते हैं, लेकिन खाना खाते वक्त सलाद फ्रेश नहीं लगता। इसके लिए आप सलाद परोसने से पहले नमक डाल दें। इससे सलाद फ्रेश भी रहेगा और टेस्ट भी बढ़ जाएगा.

19. कपड़ो पर पसीने के दाग रह जाते हैं, तो एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक डालकर पसीने के दाग पर लगाकर ब्रश या हाथ से रगड़ें. दाग अपने आप खत्म हो जाएंगे.

20. भारत इन देशों को नमक निर्यात करता है: जापान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, मलेशिया, संयुक्‍त अरब अमीरात, वियतनाम और कतर आदि.

इसरो से जुड़े 20 रोचक तथ्य



1. ISRO की Full From है “Indian Space Research Organisation”. इसका हेडक्वार्टर बेंगलूर में है यह अंतरिक्ष विभाग द्वारा कंट्रोल की जाती है जो सीधे भारत के प्रधानमंत्री को रिपोर्ट भेजता है। भारत में इसरो के कुल 13 सेंटर है।

2. ISRO की स्थापना डाॅ. विक्रम साराभाई ने सन् 1969 में स्वतंत्रता दिवस के दिन की थी। इन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक भी माना जाता है।

3. अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान, चीन समेत भारत दुनिया के उन छः देशों में शामिल है जो अपनी भूमि पर सैटेलाइट बनाने और उसे लाॅन्च करने की क्षमता रखते है।

4. भारत के लिए 86 satellites लांच करने के अलावा ISRO ने अभी तक 21 अलग-अलग देशों के लिए भी 79 satellites लांच किए है।

5. इसरो का बजट केंद्र सरकार के कुल खर्च का 0.34% और GDP का 0.08% है। यह कोई ज्यादा खर्च नही है।

6. ISRO का पिछले 40 साल का खर्च NASA के एक साल के खर्च का आधा है। वहीं नासा की इंटरनेट स्पीड 91GBps है और इसरो की इंटरनेट स्पीड 2GBps है।

7. पाकिस्तान की भी एक स्पेस एजेंसी है जिसका नाम है SUPARCO. यह 1961 में बनी थी जबकि ISRO 1969 में। ISRO आज तक अपने लिए 86 satellites लांच कर चुका है बल्कि SUPARCO सिर्फ 2 वो भी विदेशी देशों की मदद से।

8. भारत के पहले राॅकेट के लांच के समय भारतीय वैज्ञानिक हर रोज तिरूवंतपूरम से बसों में आते थे और रेलवे स्टेशन से दोपहर का खाना खाते थे। पहले राॅकेट के कुछ हिस्सों को साइकिल पर ले जाया गया था।

9. आर्यभट्ट, इसरो का पहला उपग्रह जो 19 अप्रैल 1975 को रूस की सहायता से लांच किया गया था।

10. 1981 में APPLE Satellite को संसाधनों की कमी की वजह से बैलगाड़ी पर ले जाया गया था।

11. SLV-3 भारत द्वारा लांच किया गया पहला स्वदेशी उपग्रह था और इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डाॅ. ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम थे।

12. ANTRIX, यह इसरो की कमर्शियल डिविजन है जो हमारी स्पेस तकनीक को दूसरे देशों तक पहुंचाती है। ANTRIX के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर देश के दो बड़े उद्योगपति रतन टाटा और जमशेद गोदरेज है।

13. किसी और संगठन की अपेक्षा इसरो में सबसे ज्यादा single scientist है इन्होनें कभी शादी नही की और पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया।

14. 2008-09 में इसरो ने चंद्रयान-1 लाॅन्च किया था जिसका बजट 350 करोड़ रूपए यानि नासा से 8-9 गुना कम था। इसी ने चाँद पर पानी की खोज की थी।

15. भारत (इसरो) अपने पहले प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला एकमात्र देश है। अमेरिका 5 बार सेवियत संघ 8 बार और चीन, रूस भी अपने पहले प्रयास में असफल रहे थे।

16. ISRO का मंगल मिशन आज तक का सबसे सस्ता है सिर्फ 450 करोड़ रूपए अर्थात 12 रूपए प्रति किलोमीटर, जो एक ऑटो के किराए के बराबर है। हमारा मंगल मिशन कई हाॅलीवुड फिल्मों से भी सस्ता है।

17. इसरो ने गूगल अर्थ का देशी वर्जन भुवन बनाया है यह वेब आधारित 3D सेटेलाइट इमेजरी टूल है।

18. जब बहुत से देश navigational purpose के लिए अमेरिका के GPS पर निर्भर थे तब ISRO सफलतापूर्वक अपने navigational satellites, IRNSS लांच कर चुका था।

19. आप चाहे तो इसरो से सैटेलाइट डाटा भी खरीद सकते है। HD चित्रों आदि की जरूरत पड़ने पर इस अवसर का लाभ उठा सकते है।

20. क्या आपको लगता है कि ISRO छोटी सी संस्था है ? लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इसरो ने पिछले साल 14 अरब रूपए की कमाई की थी।

जानिए काला पानी के लिए कुख्यात अंडमान निकोबार से जुड़े रोचक फैक्ट्स




अडंमान निकोबार द्वीप समूह भारत का ही हिस्सा है। यहां हर साल लाखों टूरिस्ट छुट्टियां मनाने आते हैं। लेकिन इस द्वीप के कई ऐसे फैक्ट्स हैं, जिनके बारे में आप शायद नहीं जानते होंगे। आज हम आपको अंडमान निकोबार के कुछ ऐसे ही तथ्यों से रूबरू कराने जा रहे हैं।

Fact 1. इस द्वीप की उत्पत्ति को लेकर लोगों में तरह-तरह की मान्यताएं हैं। ऐसा माना जाता है कि अण्डमान शब्द हनुमान का एक रूप है, जो संस्कृत मूल के मलय भाषा से प्रचलित हुआ है। दरअसल, मलय में रामायण के हनुमान पात्र को हन्डुमान कहा जाता है और निकोबार का मतलब है नेकेट लोगों को लैंड।

Fact 2. यहां रहने वाले मूल जनजाति बाहर से आने वाले लोगों के साथ घुलते-मिलते नहीं हैं। यहां के निवासी मुख्यतः ‘जार्वा’ जनजाति से हैं। यह 500 से भी कम की संख्या में हैं और बाहरी लोगों से बिल्कुल घुलते मिलते नहीं हैं।

Fact 3. वैश्विक स्तर पर आइलैंड बेहद चर्चित है लेकिन आज भी इसकी कई ऐसी जगहें हैं जहां इंसान पहुंच ही नहीं सका है। इसके कुल 572 आइलैंड्स में से 36 ही जाने या बसने लायक है। निकोबार में जाने के लिए सिर्फ रिसर्च या सर्वे के लिए ही चुनिंदा लोगों को इजाजत मिलती है। टूरिस्ट के लिए यहां जाना भी मुश्किल है।

Fact 4. यहां पर सबसे ज्यादा समुद्री कछुआ पाया जाता है। धरती का सबसे बड़ा कछुआ यहीं पर अपना ठिकाना बनाता है। इस कछुए का नाम Dermocheleys Coriacea है। यह साइज में बेहद बड़े होते हैं और हर साल अंडमान पहुंचते हैं। धरती का सबसे छोटा कछुआ ओलिव राइडली भी अंडमान पहुंचकर आसरा बनाता है।

Fact 5. 20 के नोट पर जंगल वाल हिस्सा अंडमान द्वीप का ही है।

Fact 6. अंडमान में कमर्शियल फिशिंग बैन है। यह धरती की उन चुनिंदा जगहों में से हैं जहां मछलियों को उम्र पूरी कर मरने का अवसर मिलता है और वह अपनी जिंदगी जीती है।

Fact 7. अंडमान के आइलैंड्स पर सदी के पहले सूर्योदय की पहली किरण पड़ी थी। ऐसा सौभाग्य कैचल आइलैंड को मिला था।

Fact 8. अंडमान में बटरफ्लाई आपको खूब दिखेंगी। अंडमान तितलियों के लिए ‘हैप्पी आईलैंड’ है। आसपास के उष्णकटिबंधीय आइलैंड से ढेरों तितलियां यहां पहुंचती हैं।

Fact 9. अंडमान में कोकोनट क्रैब बहुत ज्यादा पाए जाते हैं। ये जमीन पर पाए जाने वाले सबसे विशाल क्रेब होते है जिनकी लंबाई 1 मीटर तक हो सकती है। इनका पसंदीदा आहार कोकोनेट होता है यह अपने मुंह से नारियल के मजबूत खोल को भी तोड़ देते है।

Fact 10. यहां पर पर सबसे ज्यादा बंगाली भाषा बोली जाती है। इसके अलावा हिन्दी, तमिल, तेलगू और मलयालम भाषा बोलने वाले लोग हैं।

Fact 11. अंडमान का स्टेट एनिमल है डुगोंग। यह एक समुद्री जीव है और अपने जोड़े संग बेहद शर्मीला रहता है। इनके 5 ब्रीडिंग सेंटर हैं जिसमें से एक अंडमान में है।

Fact 12. इंडिया में केवल अंडमान में ही आपको वाल्कोनो देखने को मिलेगा। भारत में एक ही सक्रिय ज्वालामुखी है, और ये अंडमान में ही है। ये आइलैंड पोर्ट ब्लेयर से 135 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां जाकर आप इस ज्वालामुखी को देख सकते हैं।

Fact 13. पहला यूरोपीय जिसने अंडमान में अपनी कॉलोनी बनाई वह डेनिश (डेनमार्क का निवासी) था। यह 1755 में अंडमान पहुंचा था। अंग्रेज पहली बार 1789 में अंडमान पहुंचे थे, वह भी चंथम आइलैंड पर। अंग्रेजों ने यहां अपनी कॉलोनी और नेवल मिलिट्री बेस बनाया।

Fact 14. डेनिश कॉलोनियल रूल यहां 1868 में खत्म हुआ था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ब्रिटिशर्स ने इसे खरीद लिया था। इसके बाद आइलैंड का पूरा अधिकार अंग्रेजों के हाथ में चला गया।

Fact 15. सुभाष चंद्र बोस ने अपनी ‘आजाद हिंद फौज’ को जापानी मदद से और मजबूत किया। यह द्वितीय विश्व युद्ध का ही दौर था। बोस ने उत्तर और दक्षिणी आइलैंड को शहीद द्वीप और स्वराज द्वीप नाम दिया था।

Fact 16. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंडमान और निकोबार एकमात्र भारत का ऐसा भूमिक्षेत्र था जिसपर जापान ने कब्जा जमाया था। जापान ने भारत के उत्तर पूर्व के कुछ हिस्सों को भी कब्जे में लिया था लेकिन सिर्फ 6 महीने के लिए। इस आइलैंड पर 3 साल तक जापान का कब्जा रहा था।

Fact 17. अंडमान के दो आइलैंड्स का नाम ईस्ट इंडिया कंपनी के दो ऑफिसर्स के नाम पर रखा गया है। ये आइलैंड हैं- हेवलॉक और नील आइलैंड।

Fact 18. अंग्रेजी शासन में अंडमान का नाम ‘काला पानी’ की सजा के लिए चर्चित था। यहां की सेल्युलर जेल आज भी स्वाधीनता संग्राम के नायकों की कहानी कहती है। हालांकि इस जेल को अब राष्ट्रीय स्मारक में बदल दिया गया है।

Fact 19. भारत से ज्यादा अंडमान इंडोनेशिया और बर्मा के नजदीक है। अंडमान की इंडोनेशिया से दूरी 150 किलोमीटर है जबकि भारत की सीमा इससे 800 किलोमीटर दूर है।

Fact 20. अंडमान आइलैंड का 90 फीसदी इलाका सघन जंगली है। यह भारत के किसी भी राज्य से ज्यादा है।